तुरही जोर से गूंज उठी, योद्धा लड़ने लगे और हथियारों के प्रहार बरसने लगे
उनके कवच से आग निकल रही थी और अलौकिक कल्पना वाले बाण निकल रहे थे।
बाण छूटने से अद्भुत चित्र उत्पन्न होने लगे और महाबली योद्धा अत्यन्त कुपित होकर युद्धभूमि में विचरण करने लगे।736.
चाचरी छंद
(एक ने तलवार उठा ली)
के जैसा लगना
इधर-उधर चले गए
तलवार उठी, दिखी, नाची और वार हुआ।७३७।
(दूसरे ने अपने हाथ में तलवार घुमाई)
दुश्मन को दिखाया गया,
कांप उठा और
भ्रम पैदा हुआ, तलवार फिर दिखाई गई और कांपते हुए वार किया गया।७३८।
(अकेला)
अपार कटारा
शाह-राघ
विभिन्न प्रकार से प्रहार किये गये।739.
दूसरी तरफ से भी यही हाल
और चुनौती देकर
क़तरियों का
तलवारें खींच ली गईं, योद्धाओं ने चुनौती दी और भालों से प्रहार किए गए।740.
(अकेले) भाले ले लिए,
(शत्रु को) दिखाओ।
और (शत्रु को मारकर)
योद्धाओं को उठाया गया, गिराया गया और भागने पर मजबूर किया गया और उन्हें रास्ता दिखाया गया। 741.