पहले 'पवन' का नाम लें, फिर 'सुत्त' शब्द का पाठ करें।
प्रथमतः पवन नाम का उच्चारण करके, तत्पश्चात सुत शब्द जोड़कर, तत्पश्चात अनुज और सूतरी शब्द बोलने से बाण के सभी नाम मान्य हो जाते हैं।।१४६।।
मरुत्, पवन, घनन्त कर (परिवर्तनों का नाश करने वाली वायु) कहकर फिर 'सुत' शब्द का उच्चारण करें।
'मारूत, पवन और घनन्तकार' शब्दों का उच्चारण करके तथा फिर 'सुत और सुतारि' शब्दों को जोड़कर बाण के सभी नाम जाने जाते हैं।।१४७।।
सर्वव्यापी, सर्वदा, शल्यजन (पवनों के नाम) का जप करें।
सर्वव्यापक 'शल्यार्जुन' का वर्णन करके तदनन्तर 'तनुज, अनुज' शब्द जोड़कर अन्त में 'सुतारि' बोलने से बाण के नाम प्रसिद्ध होते हैं।।१४८।।
पहले 'बर' (पानी) का नाम लें, फिर 'अरि' शब्द का उच्चारण करें।
'बर' (जल) का नाम लेकर फिर 'अरि' शब्द बोलकर और तदनन्तर 'तनुज, अनुज और सुतारि' शब्द बोलकर बाण के नाम पहचाने जाते हैं।।१४९।।
सबसे पहले अग्नि का नाम लें और अंत में 'अरी' शब्द लगाएं।
पहले अग्नि का उच्चारण करके फिर अर शब्द जोड़कर तत्पश्चात तनुज और सुतारि शब्द बोलने से बाण नाम प्रसिद्ध होते हैं।150.
सबसे पहले अग्नि का नाम लें और फिर अंत में 'अरी' शब्द जोड़ें।
पहले अग्नि का नाम लेकर फिर अरि जोड़कर तत्पश्चात तनुज, अनुज और अरि कहकर बाण के नाम बोले जाते हैं।151
पहले अग्नि का नाम लें, फिर 'अरी' शब्द दो बार जोड़ें।
पहले अग्नि का नाम लेकर फिर ‘अरि-अरि’ कहकर तथा तदनन्तर ‘तनुज, अनुज और अरि’ कहकर बाण के नाम बोले जाते हैं।152.
(फिर) 'पावकरि' (अग्नि, जल का शत्रु) 'अग्नंता कर' (अग्नि, जल का नाश करने वाला) कहते हुए 'अरि' शब्द का उच्चारण करें।
'पावकरि और अग्नन्त' कहकर और फिर 'अनुज तनुज और सुतारि' कहकर बाण के नाम पहचाने जाते हैं।।153।।
हिम बारी (शीतल वायु) बखा (बगुला) संहारक वायु, गादी (गदाधारी) भीम (व्यापक, वायु) शब्द के बाद
हिमवारी, बक-हया, गादि और भीम शब्दों में तनुज, अनुज और सुतारि शब्द जोड़ने से बाण के नाम प्रचलित हुए।154.
दुर्योधन का नाम लें और अंत में 'अरि' जोड़ें।
दुर्योधन के नाम के साथ ‘अरि’ शब्द जोड़कर फिर ‘अनुज और सुतारि’ शब्दों का उच्चारण करने से बाण नाम ज्ञात होते हैं।155.
अंध (धृतराष्ट्र) के पुत्रों के नाम बताओ और अन्त में 'अरी' शब्द बोलो।
धृतराष्ट्र के पुत्रों के नाम बोलने के बाद अंत में ‘अरि’ शब्द जोड़कर तथा तदनन्तर ‘अनुज और सुतारि’ बोलने से बाण के नाम ज्ञात होते हैं।।१५६।।
दुशासन, दुर्मुख, द्रुजै (बाद में) 'अरि' शब्द कहें।
'दुःशासन, सुरमुख और दुर्विजय' शब्दों का उच्चारण करके फिर 'अरि' जोड़कर तथा तदनन्तर 'अनुज और सुतारि' कहकर बाण के नाम पहचाने जाते हैं।।१५७।।