उन्होंने जो भी पुरस्कार दिया, सभी ने उसे स्वीकार किया और किसी ने भी कोई विरोध नहीं दिखाया।(25)
दोहिरा
मुरारी (विष्णु) ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर रखा था,
और शैतानों को तुरन्त बहका दिया।(26)(1)
शुभ चरित्र का 123वाँ दृष्टान्त - राजा और मंत्री का वार्तालाप, आशीर्वाद सहित सम्पन्न। (123)(2414)
दोहिरा
नारनौल नामक स्थान पर विजय सिंह नामक एक राजा रहता था।
वह अधिकतर समय फूल माटी के साथ लेटे हुए बिताते थे।(1)
वह व्यक्ति, जिसका विजय सिंह आठों पहर आदर करते थे,
फूल माटी थी, और वह फूलों के गुच्छे जैसी थी।(2)
एक दिन विजय सिंह शिकार खेलने निकला।
वहाँ उसकी मुलाकात भरम कला से हुई और उसके प्रति उसके मन में उत्कट इच्छा उत्पन्न हुई।(3)
चौपाई
उसने वहीं शादी कर ली और महिला को घर ले आया।
उससे विवाह कर लिया और उसे घर ले आए, क्योंकि वह राजा के लिए भी मोटी थी।
फूल माटी (नयी शादी की बात) बहुत नाराज हो गयी।
यह जानकर फूलमती क्रोधित हो गयीं, किन्तु उन्होंने उनका सत्कार किया।(4)
उन्होंने (फुल मती ने) उससे बहुत स्नेह दिखाया
उसने उसे अत्यन्त प्रेम दिया और उसे अपनी धर्म-बहन कहा।
परन्तु उस स्त्री ने अपने हृदय में बहुत क्रोध रखा।
अंदर ही अंदर वह क्रोधित थी और उसने उसे नष्ट करने का फैसला कर लिया था।(5)
उस स्त्री को (अर्थात् नींद को) जिसका उपासक जानता था,
जिसका वह आदर करती थी, उसे समाप्त करने का उसने मन बना लिया।
(उन्होंने) रुद्र का एक मंदिर बनवाया
बहुत सारा धन खर्च करके उसने एक शिव मंदिर बनवाया।(6)
दोनों स्लीपर वहीं जाते थे
दोनों सह-पत्नियाँ वहाँ गईं और शिव की पूजा की।
मंदिर ('मुट'-मठ) बहुत अच्छा था और उस पर एक ऊंचा झंडा लगा हुआ था
मंदिर का शिखर काफी ऊंचा था और देवताओं, असुरों और सभी अन्य लोगों ने इसकी सराहना की थी।(7)
दोहिरा
शहर की सभी महिलाएँ उस मंदिर में गईं,
और शिव की आराधना कर अपने घर लौट गए।(८)
अरिल
एक दिन रानी उसे (भ्रमर काला को) वहाँ ले गई
एक दिन रानी उसे वहां ले गई और हाथ में तलवार लेकर उसका सिर काट दिया।
सिर काटकर शिवजी की मूर्ति पर रख दिया
उसने कटा हुआ सिर शिव को भेंट कर दिया और स्वयं आकर राजा को बताया।
दोहिरा
'धर्म-बहन मुझे मंदिर ले गई है,
'और वहाँ उसने अपना सिर काटकर शिव को भेंट कर दिया।'(10)
चौपाई
यह सुनकर राजा वहाँ आये।
यह जानकर राजा उस स्थान पर आये जहां उसका कटा हुआ सिर पड़ा था।
यह देखकर राजा मन ही मन आश्चर्यचकित हो गया।
वह आश्चर्यचकित हुआ, लेकिन उसने महिला से कोई विवाद नहीं किया।(11)
दोहिरा
(उन्होंने कहा,) 'जिस स्त्री ने अपना सिर काटकर अपने हाथों से शिव को अर्पित किया है,
'वह और उसके माता-पिता सम्मान के पात्र हैं।'(12)