(राजा) 'केवल वही मनुष्य पैरों के द्वारा रेंगता है, जो मैथुन में रत नहीं हो सकता,
और सारी रात हिजड़े की तरह बैठा रहता है और कोई कर्म नहीं करता।
'मैं धर्म से प्रभावित होकर तुम्हारे साथ मैथुन नहीं करूंगा।
'मैं हमेशा जनता की आलोचना से डरता रहता हूँ।(29)
(उसने कहा,) 'तुम जो भी करो, लेकिन मैं तुम्हें सेक्स के बिना कभी नहीं छोडूंगी।
'मैं अपने ही हाथों से तुम्हें फाड़ डालूँगा,
और, फिर, खुद को कांशी में काट डालूंगा और, यहां तक कि सामना भी करूंगा
धर्म का स्वामी अपने दरबार में।(30)
'ओह मेरे प्यार, मैंने तुम्हारे साथ बिस्तर पर जाने की कसम खाई है, और
'मैं अपने आप को शारीरिक रूप से पूरी तरह से संतुष्ट करता हूँ।
'आज रात, सेक्स के ज़रिए मैं तुम्हें और भी खूबसूरत बना दूँगा,
और कामदेव का भी अभिमान नष्ट कर दूँगा।'(३१)
राजा बोले, 'सबसे पहले भगवान ने मुझे काशात्रिय जन्म दिया है,
सबसे पहले भगवान ने मुझे छत्री कुल में जन्म दिया।
हमारे राजवंश का विश्व में बहुत सम्मान है।
(राजा के रूप में) विराजमान होने के कारण मेरी पूजा होती है।
'परन्तु अब यदि मैं तुम्हारे साथ रमण करुंगा तो मेरा पुनर्जन्म नीच जाति में होगा।'(32)
(स्त्री ने कहा) जन्म की क्या बात है, ये सब जन्म तो तुम्हारे ही बनाए हुए हैं।
(उसने कहा,) 'तुम जन्म के बारे में क्या कह रहे हो? वे तो तुम्हारी मनगढ़ंत बातें हैं..
'अगर तुम मेरा ख्याल नहीं रखोगे, तो यह मेरा दुर्भाग्य होगा।
'तुमसे मिले बिना मैं जहर खा लूँगा।'(३३)
दोहिरा
राजा को चिंता थी कि अगर उसने भगवती देवी की शपथ लागू कर दी,
उसे उसके साथ बलात्कार करना होगा और फिर नरक में जाना होगा।(34)
(उसने) 'अपने सारे संदेह दूर कर दो, मेरा आस्वाद लो,
'क्योंकि कामदेव मुझ पर हावी हो गए हैं।'(35)
(हो) ' नरक के भय से कामदेव चाहे कितना भी अभिभूत कर दें,
मैं कभी भी तुम्हारे साथ व्यभिचार नहीं करूंगा।'(36)
छंद
(उसने) कहा, 'तुम्हें जवानी मिली है और मैं भी जवान हूं।
'तुम्हें देखकर मैं जोश से भर गया हूं।
'अपनी सारी गलतफहमियां त्याग दो और मेरे साथ सेक्स का आनंद लो,
'और नरक के डर की चिंता मत करो।'(37)
दोहिरा
'जो स्त्री मेरी पूजा करने के लिए मेरे पास आती है,
'मेरे लिए वह मेरे गुरु की पुत्री के समान है।'(38)
छंद
औरतों से प्यार की क्या बात करें, क्योंकि वे कभी पूरी नहीं होतीं,
वे एक आदमी को छोड़ देते हैं और दूसरे की तलाश करते हैं जो अधिक सुंदर होता है।
क्योंकि जिस किसी पर वह मन लगाती है, उसके साम्हने वह नंगी हो जाती है,
और तुरन्त उसे अपना नग्न मूत्रालय प्रस्तुत करती है।(39)
दोहिरा
(वह सोचती हुई बोली) 'मुझे अपने बचाव के लिए क्या करना चाहिए, जिससे मेरा मन शांत हो जाए?
'तुम्हारी बातें प्रेमपूर्ण हैं, मैं तुम्हें कैसे मार सकता हूँ।(४०)
चौपाई
राजा ने मन ही मन ऐसा सोचा।
:उसके साथ रहने से मेरा धर्म नष्ट हो गया है,
इससे मेरा धर्म चला जाता है