सबसे पहले सभी जानवरों के नाम बोलें, फिर अंत में 'अर्दन' शब्द बोलें।
प्रारम्भ में “मृग” (मृग) से सम्बन्धित सभी नामों को बोलने से तथा अन्त में “अर्दन” शब्द बोलने से बाण के समस्त नामों की उत्पत्ति होती रहती है।।२२९।।
पहले 'कुम्भकरण' शब्द बोलें, फिर 'अर्धन' शब्द बोलें।
बुद्धिमान पुरुष प्रारम्भ में ‘कुम्भकरण’ शब्द का उच्चारण करके तथा तत्पश्चात् ‘अर्दन’ शब्द का उच्चारण करके बाण के समस्त नामों को समझ लेते हैं।
पहले 'रिपु समुद्र पीत' कहकर फिर 'कण' और 'अरि' शब्द बोलो।
प्रारम्भ में ‘ऋप-समुद्र’ शब्द का उच्चारण करने से तथा अन्त में ‘काणारि’ शब्द का उच्चारण करने से बाण के असंख्य नाम विकसित होते हैं।231.
पहले 'दशग्रीव' (रावण) का नाम लें, फिर 'बंधु अरि' शब्द जोड़ें।
बुद्धिमान लोग प्रारम्भ में ‘दशग्रीव रावण’ का नाम लेकर तथा तत्पश्चात् ‘वध और अरि’ शब्द जोड़कर मन ही मन बाण के सभी नामों को पहचान लेते हैं।232.
पहले 'खोल' (कवच) या 'खड़ग' शब्द बोलें, फिर अंत में 'खत्रियांत' या 'हरि' शब्द बोलें।
"खोल, खड़ग, क्षत्रियान्तकारक और केहरी" शब्दों से समाप्त होकर बाण के सभी नाम विकसित हो जाते हैं।233।
अंत में कवच, कृपाण या कटारी कहकर 'अरी' शब्द बोलें।
कवच, कृपाण और कटारि शब्दों का उच्चारण करके और अन्त में अरि शब्द जोड़कर मन में बाण का नाम लिया जाता है।।२३४।।
सबसे पहले सभी अस्त्र-शस्त्रों के नाम बोलें और अंत में 'अरि' शब्द जोड़ें।
सर्वप्रथम समस्त अस्त्र-शस्त्रों के नाम का उच्चारण करके अंत में ‘अरि’ शब्द जोड़कर मन में बाण के समस्त नामों को पहचान लिया जाता है।
(पहले) सुला, सैह्ति, शत्रु कहकर, फिर 'हा' पद या 'सिप्रादार' (ढाल तोड़ने वाला) कहकर।
अन्त में 'शूल, सैहति, शत्रुहा तथा सिप्रादार' इन शब्दों को कहने से बाण के सभी नाम विकसित हो जाते हैं।
समरसंदेशो (युद्ध का वाहक) शत्रुहा (शत्रु का वध करने वाला) स्त्रान्तक (शत्रु का नाश करने वाला) जिसके (ये) तीन नाम हैं।
हे बाण! आपके नाम समर, संदेश, शत्रुहा, शत्रुहा और शत्रुंतक हैं, आप सम्पूर्ण वर्णों के रक्षक और साधुओं को सुख देने वाले हैं।।237।।
पहले 'बार' (छाती) शब्द बोलें, फिर 'अरी' शब्द बोलें।
प्रारम्भ में ‘वर’ शब्द बोलकर और फिर ‘अरि’ शब्द बोलकर शत्रुओं का नाश करने वाले बाण के नाम निरन्तर बढ़ते रहते हैं।।238।।
'साखन' शब्द का उच्चारण पहले 'दखन' कहकर करें।
पहले दक्षिण शब्द का उच्चारण करके अंत में भक्षण शब्द का उच्चारण करने से बाण का अर्थ समझ में आता है, क्योंकि राम ने बाण का भोग दक्षिण देश के निवासी रावण को देकर उसका वध किया था।
पहले 'रिसरा' पद कहें और फिर 'मांदरी' पद कहें।
प्रारम्भ में 'रिसरा' कहकर फिर 'मुण्डारी' शब्द बोला जाता है और फिर रघुपति (राम) की बाण का उच्चारण किया जाता है।।240।।
दस सिर वाला (रावण) जिसका बन्धु (कुम्भकर्ण) और स्वामी (शिव) शक्तिशाली कहलाते हैं,
रघुनाथ (राम) ने अपने एक ही बाण से रावण के टुकड़े-टुकड़े कर दिए तथा महाबली दशग्रीव रावण के सम्बन्धियों को भी सिरविहीन धड़ बना दिया।241.
पहले 'सुग्रीव' शब्द बोलें, फिर 'बन्धुरि' (बन्धुआरी) बोलें।
प्रारम्भ में सुग्रीव शब्द कहकर फिर “बन्ध” शब्द जोड़कर बुद्धिमान लोग बाण के सब नाम जान लेते हैं।।242।।
पहले 'अंगद पितु' बोलकर अंत में 'अरि' शब्द जोड़ें।
प्रारम्भ में “अंगद-पितृ” (बलि) कहकर फिर “अरि” शब्द जोड़ने से बाण के सभी नाम समझ में आ जाते हैं।।243।।
हनुमानजी का नाम लेते हुए कहें 'ऐस अनुज अरि'।
हनुमानजी के नामों का उच्चारण करने तथा उनके साथ ‘ईश, अनुज और अरि’ शब्द जोड़ने से मन में बाण के सभी नामों का ज्ञान हो जाता है।
पहले 'शास्त्र' शब्द बोलें, फिर अंत में 'अरी' शब्द बोलें।
सर्वप्रथम ‘शास्त्र’ शब्द का उच्चारण करने पर तथा अंत में ‘अरी’ शब्द जोड़ने पर बाण के सभी नाम ज्ञात हो जाते हैं।
पहले 'अस्त्र' शब्द का उच्चारण करें और अंत में 'अरि' शब्द का उच्चारण करें।
प्रारम्भ में ‘अस्तर’ शब्द और अन्त में ‘अरि’ शब्द कहा जाता है, इस प्रकार बाण के सभी नाम बोधगम्य हो जाते हैं।
सबसे पहले 'आकर्षण' (ढाल) के सभी नाम लें और फिर अंत में 'अरी' शब्द जोड़ें।
“चरम” के सभी नामों को बोलते हुए और अंत में “अरि” शब्द जोड़ते हुए शत्रु-विनाशक बाण के असंख्य नामों का विकास होता रहता है।247.
(पहले) 'तनु त्राण' (शरीर का रक्षक, कवच) के सभी नामों का उच्चारण करें, अंत में 'अरि' शब्द जोड़ें।
तन-त्राण (कवच) के अंत में “अरि” शब्द जोड़ने से बाण के सभी नाम बनते हैं, जिनके प्रति हमें स्नेह प्रदर्शित करना चाहिए।
(पहले) 'धनुख' के सभी नाम बोलें और फिर 'अर्दन' शब्द का उच्चारण करें।
धनुष के सब नाम बोलकर फिर अर्दन शब्द बोलने से बाण के सब नाम ज्ञात हो जाते हैं।।249।।
सबसे पहले 'पंच' (चिल्ला) के सभी नाम लें, फिर 'अंतक' शब्द का उच्चारण करें।
पणच (प्रत्यच) के नाम बोलकर फिर अन्तक शब्द जोड़कर बाण के सभी नामों का वर्णन किया जाता है।।२५०।।
पहले 'सर' शब्द बोलें, फिर 'अरी' शब्द का उच्चारण करें।
प्रारम्भ में 'शर' शब्द बोलकर फिर 'अरि' शब्द जोड़ने से बाण के सभी नाम मन ही मन जाने जाते हैं।।२५१।।
पहले 'मृग' (चरा हुआ पशु) शब्द का उच्चारण करें और फिर 'हा' शब्द का उच्चारण करें।
प्रारम्भ में ‘मृग’ शब्द बोलकर फिर ‘हा’ शब्द जोड़ने से ‘मृग-हा’ शब्द बनता है, जो मृग का नाश करने वाले बाण का बोध कराने वाला है, जिसे बुद्धिमान पुरुष मन में पहचान लेते हैं।