लेकिन उसने कहा कि वह जरूर जायेगी और बिना रस्सी के जायेगी,
वह स्त्री को साथ लेकर नदी के किनारे पहुंचा और जाट ने उससे पूछा, 'मेरी बात सुनो,(12)
वह स्त्री को साथ लेकर नदी के किनारे पहुंचा और जाट ने उससे पूछा, 'मेरी बात सुनो,(12)
'मेरे प्रियतम, मैं आपसे नाव पर चढ़कर पार जाने का अनुरोध करता हूँ।'
औरत बोली, मैं बैल की पूँछ से जाऊँगी
महिला ने कहा, 'नहीं, मैं बैल की पूंछ पकड़कर पार जाऊंगी।'(13)
सवैय्या
सुबह के समय नदी जोर-जोर से बह रही थी और लोग उसे देखने के लिए वहां आए थे।
डर के मारे सासें नहीं आईं और ननदें दहलीज से ही वापस लौट गईं।
पड़ोसी अपने-अपने घरों को लौट गए, सभी हैरान थे, 'यह कैसी औरत है?'
'अगर कोई एक गिलास पानी मांगे तो वह आप पर पत्थर फेंक देगी। वह एक महिला के बजाय एक क्रोधी शेरनी की तरह व्यवहार करती है।'(14)
दोहिरा
बैल की पूँछ पकड़कर जब वह पानी में कूदी,
सब चिल्लाये कि पूंछ को बहुत कसकर पकड़ो।(15)
लेकिन जब उसने यह सुना तो उसने पूंछ ढीली कर दी,
और वह ऊँची आवाज़ में कसम खाता हुआ मौत के फ़रिश्ते के राज्य में चला गया।(16)
इस प्रकार उस झगड़ालू औरत से छुटकारा पाकर जाट घर वापस आ गया।
ऐसी स्त्री से विवाह करने वाला पुरुष कैसे शांतिपूर्वक रह सकता है?(17)(1)
शुभ चरित्र का चालीसवाँ दृष्टान्त - राजा और मंत्री का वार्तालाप, आशीर्वाद सहित सम्पन्न।(40)(598)
दोहिरा
शाहजहाँपुर शहर में एक रेशम बुनकर की पत्नी रहती थी।
उसने जो कुछ दिखाया, मैं उसे उचित संशोधन के साथ बताने जा रहा हूँ।(1)
अरिल
उस महिला का नाम प्रीत मंजरी था।
और उस आदमी को सेनापति के नाम से जाना जाता था।
उसे वीर भदर नामक एक व्यक्ति से प्यार हो गया था।
उसने अपनी दासी को भेजकर उसे अपने घर बुलाया।(2)
चौपाई
वह उससे बहुत प्यार करता था
वह उससे बहुत प्यार करती थी और समय के साथ उसने उसके साथ यौन संबंध भी बनाना शुरू कर दिया था।
वह उससे बहुत प्यार करती थी और समय के साथ उसने उसके साथ यौन संबंध भी बनाना शुरू कर दिया था।
संयोगवश उसका पति प्रकट हुआ और उसने मित्र को बड़े मिट्टी के घड़े में छिपा दिया।(3)
संयोगवश उसका पति प्रकट हुआ और उसने मित्र को बड़े मिट्टी के घड़े में छिपा दिया।(3)
उसने घड़े में दो खरबूजे डाले; एक कटा हुआ था और दूसरा पूरा।
उसने किसी का गुदा खा लिया और खोपड़ी अपने सिर पर रख ली
गूदा निकालने के बाद उसके सिर पर खोल रख दिया गया तथा उसके ऊपर दूसरा खोल रख दिया गया।( 4 )
गूदा निकालने के बाद उसके सिर पर खोल रख दिया गया तथा उसके ऊपर दूसरा खोल रख दिया गया।( 4 )
इसी बीच रेशम-बुनकर घर में आया, वह चारपाई पर बैठ गया और प्यार की वर्षा की।
इसी बीच रेशम-बुनकर घर में आया, वह चारपाई पर बैठ गया और प्यार की वर्षा की।
उसने स्त्री से कहा कि जो कुछ वह उसके खाने के लिये लाई है, वह सब ले आओ(5)
जब महिला ने यह सुना
जब उसने उसे ऐसा कहते सुना, तो उसने तरबूज काटकर उसे खाने को दिया।
मित्रा उससे बहुत डरता था
मित्र को डर लगा कि कहीं वह महिला अब उसे मार न डाले।(6)
(उसने) तरबूज काटा और पति को खिलाया
लेकिन उसने तरबूज काटा, उसे (पति को) खाने को दिया और फिर सेक्स किया।
उसने यौन संबंध बनाने के बाद उसे भगा दिया
संभोग करने के बाद उसने उसे बाहर भेज दिया। फिर उसने दोस्त को बाहर निकाला और वे बिस्तर पर बैठ गए।(7)