उनके रथों के घोड़े और सारथि सभी घायल हो गये और सेना सहित वे सभी यम के घर चले गये।
दोहरा
चपल सिंह, चतुर सिंह, चंचल सिंह और बलवान;
चपल सिंह, चतुर सिंह, छीतर सिंह, चौप सिंह आदि महान योद्धा वहां उपस्थित थे।1393.
छत्र सिंह, मान सिंह और सत्र सिंह (जो) बाली योद्धा हैं
छत्तर सिंह, मान सिंह, शतर सिंह आदि पराक्रमी सेनापति वहां उपस्थित थे।1394.
स्वय्या
सभी दस राजा क्रोध में खड़ग सिंह पर टूट पड़े
उनके आगमन पर उन्होंने अपने धनुषों से कई बाण छोड़े
वहाँ रथ के सोलह घोड़े और दस शक्तिशाली योद्धा मारे गए।
इसके साथ ही बीस सारथि और तीस रथ-स्वामी भी मर गये।
खड़ग सिंह पुनः युद्ध में सात घुडसवारों तथा अनेक पैदल सैनिकों को मार गिराते हुए आगे बढा
कवि श्याम कहते हैं कि उसी क्षण खड़ग सिंह ने पचास अन्य महान योद्धाओं को मार डाला
दस राजाओं की सेना का एक बड़ा भाग उसी प्रकार भाग गया, जैसे वन में सिंह को देखकर हिरण भाग जाते हैं।
परन्तु उस युद्ध में पराक्रमी खड़गसिंह बड़े क्रोध के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ा रहा।1396.
कबित
युद्ध में सभी दस राजाओं ने भाग लिया
उन्होंने अपनी सेना को विपत्ति में डाल दिया और प्रतिज्ञा की कि कोई किसी से नहीं डरेगा, ये सभी दस राजा क्रोधित होकर उस पराक्रमी योद्धा खड़गसिंह के सामने गये।
कवि श्याम कहते हैं, खड़ग सिंह ने क्रोधित होकर धनुष खींचकर उसके कान पर लगा दिया।
जब खड़गसिंह ने अत्यन्त क्रोध में आकर धनुष कान तक खींचा तो उसने दस-दस बाणों से प्रत्येक राजा को मार डाला, यद्यपि वे राजा हाथी के समान विशाल तथा युद्ध-कौशल में निपुण थे।1397.
दोहरा
श्री कृष्ण के पांच योद्धा शत्रु पर आक्रमण कर रहे हैं
कृष्ण के पांच अन्य योद्धा शत्रु पर टूट पड़े, जिनके नाम छकट सिंह, छतर सिंह, छऊ सिंह और गौर सिंह आदि थे।
सोर्था