प्रारम्भ में ‘सरष्टि’ शब्द का उच्चारण करके तत्पश्चात ‘नाथ’ शब्द का उच्चारण करना।
प्रभु के सभी नाम हृदय में धारण किये जाते हैं।३१.
प्रारम्भ में ‘सरिष्टी’ शब्द का उच्चारण करके तत्पश्चात ‘वाहन’ शब्द का उच्चारण करना।
इस प्रकार कवि जगत् की माता दुर्गा के सभी नामों का उच्चारण कर सकते हैं।32.
वह भगवान शत्रुओं का नाश करने वाला, जगत का रचयिता तथा इस संसार के मूर्ख लोगों का नाश करने वाला है।
उसका नाम स्मरण करना चाहिए, जिसके सुनने से सारे दुःख दूर हो जाते हैं।
समस्त अस्त्र-शस्त्रों के नाम बोलते हुए, आदि और अन्त में ‘पति’ शब्द बोलें।
कृपाण के सब नाम हृदय में अपनाये।३४।
यह क्षत्रियों के अंग में खेलता है इसे खड़ग, खंडा या क्षत्रियों का शत्रु कहा जाता है
यह युद्ध का अंत लाती है, यह खालों का नाश करने वाली है, ये तलवार के सोच-समझकर कहे गए नाम हैं।35.
इसे सभी तत्वों का अंत करने वाली और सभी कष्टों का नाश करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है।
हे तलवारभवानी (देवी)! आप भय का नाश करने वाली हैं और सबको सुख प्रदान करने वाली हैं।
अधिचोल
यदि तलवार "भूत" बोलने के बाद "अ" शब्द बोला जाए,
फिर तलवार के सभी नाम बोले जाते हैं
यदि मृग (हिरण) के सभी नामों के उच्चारण के बाद धनु शब्द बोला जाए,
तो ये सब खण्ड के नाम हैं, जो सत्य हैं।।३७।।
दोहरा
प्रारम्भ में “यम” का नाम बोलने के बाद यदि “रादन” (दांत) शब्द बोला जाए,
तब हे कवियों! तब जामदाध के नाम ठीक-ठीक समझ में आ सकेंगे।।३८।।
प्रारम्भ में उदार शब्द बोलना और फिर अर शब्द बोलना।
जामदाध के सभी नामों का विचार सही ढंग से प्रकट किया जा सकता है।
‘मृग-ग्रीवा’ और ‘शिर-अर’ कहकर फिर ‘अस’ शब्द बोलें,
खड़ग के सभी नाम बोले जा सकते हैं।४०।
कर, करान्तक, कशत्रिपु, कालयुद्ध, करवार, करचोल आदि शब्दों का सही उच्चारण करना।
कृपाण नाम बोले जा सकते हैं।४१।
प्रारम्भ में “हस्त, करि, कार” कहकर फिर “अर” शब्द सुनाने से,
तब शस्त्रों के राजा कृपाण का नाम आता है - हे कृपाण! मेरी सहायता करो।।४२।।
हे सिरोही, विजय के प्रतीक! तुम सिंह के समान हो, तुम्हारे समान कोई दूसरा नहीं
हे प्राणियों! यदि तुम सब लोग तेग़ को याद करोगे तो सबका उद्धार हो जायेगा।43.
प्रारम्भ में खग, मृग, यक्ष, भुजंग, गण आदि शब्दों का उच्चारण करना
फिर “अर” बोलने पर परिणामी शब्द का अर्थ तलवार होता है।४४.
अन्य देशों में इसके नाम हलब्बी, जनाब्बी, मगरबी, मिसरी, उआन, सैफ, सिरोही आदि हैं।
शस्त्रों के स्वामी कृपाण के नाम जिन्होंने रम, शम आदि देशों पर विजय प्राप्त की है।45.
यमन में "कांति" के नाम से प्रसिद्ध तथा भारत में सभी शस्त्रों में प्रमुख भगवती के रूप में प्रसिद्ध,
इसे स्वयं कल्कि अवतार ने धारण किया था।४६.
प्रारम्भ में ‘शक्ति’ शब्द का उच्चारण करना तथा बाद में ‘शक्त’ शब्द का उच्चारण करना।
सैहथी के सभी नाम उच्चारित हैं।४७।
सबसे पहले "सुभात" शब्द का उच्चारण करें और फिर "अर्देह" कहें,
बुद्धिमान लोग अपने मन में सैहथी के नाम समझते हैं।४८।
प्रारम्भ में “सन्ना” शब्द बोलना और फिर “रिपु” शब्द बोलना,
सैहथी के सभी नाम चतुराई से बोले जाते हैं।४९।
प्रारम्भ में “कुम्भ” शब्द का उच्चारण करके फिर “अर” शब्द का उच्चारण करना,
हे बुद्धिमान लोगों! तुम अपने मन में सिहति के सभी नामों को समझो।
तंत्राणां शब्द का उच्चारण करने के बाद फिर अर शब्द का उच्चारण करें
हे बुद्धिमान् लोगों! सैहति के सभी नाम रुचिपूर्वक कहे जाते हैं।
प्रारम्भ में ‘यष्टिश्वर’ कहना और फिर ‘अर्धंग’ कहना,
सैहथी के सभी नाम वर्णित किये जा सकते हैं।५२।