एक दिन राजा ने सभा बुलाई और अपनी सभी स्त्रियों को बुलाया।
उसने बताया कि उसके पास आखिरी बार एक अंगूठी थी।
राजा ने कहा मेरी अंगूठी खो गई है।
नौकरानी उठकर बोली कि वह उसके पास है।(6)
(राजा ने पूछा-) यह अंगूठी तुम्हें कहां से मिली?
‘तुम्हें यह अंगूठी कहां मिली?’ ‘यह रास्ते में पड़ी थी,
मैंने उसे अपने हाथ से उठा लिया।
'और मैंने इसे उठा लिया। अब राजा, कृपया आप इसे ले लीजिए।'(7)
दोहिरा
'जिसे भगवान ने दिया है, मैं उसे भी देता हूं।'
पत्नी राजा द्वारा किये गये छल को नहीं समझ सकी।(८)(१)
शुभ चरित्र का चौसठवाँ दृष्टान्त - राजा और मंत्री का वार्तालाप, आशीर्वाद सहित सम्पन्न। (64)(1135)
चौपाई
महोबे नगर में एक राजपूत रहता था।
दुनिया में वे मित्तर सिंह के नाम से जाने जाते थे।
उसने लोगों को दक्षिण की सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी
वह लोगों को जाने नहीं देता था और मारपीट कर उन्हें लूट लेता था।
जो भी कायर होगा, उससे पैसे चुरा लेगा
उसने कायरों को लूटा और जो डटे रहे, उन्हें मार डाला।
(इस प्रकार) वह सबको लूट लेगा
सब कुछ लूटने के बाद वह आकर स्त्री को धन दे जाता था।(2)
एक दिन वह एक डाकू को मारने गया।
एक बार जब वह लूटने गया तो उसकी मुलाकात एक योद्धा से हुई।
घोड़ा दौड़ते समय गिर गया।
अपने घोड़े को तेजी से भागने के लिए दौड़ाते समय वह गिर पड़ा और योद्धाओं ने उसे पकड़ लिया।(3)
दोहिरा
वह उसे बांधकर मारने के लिए काल्पी नगर ले आया।
खबर पाकर उसकी पत्नी भी वहां आ पहुंची।(4)
चौपाई
उसने गोबर उठाया और घोड़े पर डाल दिया
वह घोड़ों की लीद की टिकियाँ इकट्ठी कर रही थी ताकि किसी को शक न हो।
वह जल्दी से भाग गई ताकि उसके पति की हत्या न हो जाए।
वह अपने पति को फांसी से बचाने के लिए तेजी से दौड़कर वहां पहुंची।(5)
दोहिरा
उसने उसका (योद्धा का) हाथ झटक दिया और अपने पति और घोड़े को ले लिया।
और उसकी तलवार लेकर उसने उसे (योद्धा को) मार डाला।(6)
चौपाई
जो सवार वहां पहुंचा, उसे भी मार डाला
जो भी घुड़सवार आगे आता, वह उसे बाण से मार देती।
(वह) किसी से नहीं डरती
उसने किसी की परवाह न करते हुए अपने पति को ले जाकर घर ले आई।(7)(1)
शुभ चरित्र का चौसठवाँ दृष्टान्त - राजा और मंत्री का वार्तालाप, आशीर्वाद सहित सम्पन्न। (64)(1135)
दोहिरा
रूप नगर में एक मंत्री की एक पुत्री थी।
तीनों लोकों में उसके समान सुन्दर कोई नहीं था।(1)
सुंदरता के साथ-साथ भगवान ने उसे बहुत सारा धन भी दिया है।
उनका प्रभाव सभी चौदह महाद्वीपों में फैल गया था।(2)
स्याम देश के शाह के पास एक सान था,