दोनों ओर से हथियार चले।
दोनों पक्षों ने हथियार दिखाये तथा दोनों पक्षों ने युद्ध के बिगुल बजाए।
कृपाण को इतनी सफलता मिली
तलवारें इतनी तीव्रता से लहराई गईं कि अधिकांश महिलाएँ मारी गईं।(17)
दोहिरा
बज्र, बाण, बिच्छू, बाण आदि असंख्य अस्त्र-शस्त्र।
सारी औरतें मार दी गईं, एक भी औरत नहीं बची। 18.
चौपाई
दोनों ने दोहरे फलों वाले भाले लिए
दोनों ने दोधारी भाले पकड़ लिए और एक-दूसरे के पेट में घोंप दिए।
उनको सहकर वे खंजरों से लड़े
उन्हें फेंककर उन्होंने खंजरों से युद्ध किया और दोनों ने अपने प्राण त्याग दिये।(19)
दोहिरा
अपने प्रेमी की खातिर दोनों ने दुश्मन से भी लोहा लिया था,
और इस तरह वे अपने साथी से मिलने स्वर्ग पहुँचे। (20)
प्रशंसा के योग्य थीं वे महिलाएं, जिन्होंने अपने प्यार के लिए लड़ाई लड़ी,
वे संसार में सम्मानित हुए और स्वर्ग में भी स्थान प्राप्त किया। (21)
उन्होंने कष्ट तो सहे लेकिन कभी पीठ नहीं दिखाई।
और, जैसा कि कवि श्याम कहते हैं, इस प्रसंग का वर्णन यहीं समाप्त होता है।(22)(1)
शुभ चरित्र का 122वाँ दृष्टान्त - राजा और मंत्री का वार्तालाप, आशीर्वाद सहित सम्पन्न। (122)(2388)
चौपाई
देवता और दानव दोनों एक साथ
देवता और असुर सभी एकत्र होकर समुद्र मंथन करने चले गये।
जैसे ही चौदह रत्न निकाले गए,
जब उन्होंने चौदह खजानों को निकाल लिया, तो शैतान क्रोधित हो गए।(1)
(और कहने लगे) हम अकेले ही चौदह रत्न लेंगे,
'हम सभी चौदह निधियों को ले लेंगे, अन्यथा हम देवताओं को शांति से नहीं रहने देंगे।
सैनिकों के अनगिनत समूह बाहर आये।
'हमारी असंख्य सेना उठेगी और देखेगी कि वे छोटे भाइयों से बचकर कैसे निकलते हैं।'(2)
दोहिरा
संप्रभुता, शासन, जिम्मेदारियाँ और ये सब,
वे हमेशा बड़े भाइयों को दिए जाते हैं, छोटे भाइयों को नहीं।(3)
भुजंग छंद
उस समय बड़े-बड़े दिग्गज नाराज हो गए
भयानक शैतानों ने घिनौने ढोलों की आवाज के बीच क्रोध में हमला किया।
वहाँ से देवता भी क्रोधित होकर आये।
उधर देवता ऐसे उठे मानो अग्नि की हवा चल रही हो।(4)
अत्यन्त क्रोधित होकर (योद्धागण) रुक गये हैं।
एक ओर तो अहंकारी शैतान क्रोध में तैयार हो गए,
क्रोधित योद्धा एकत्र हुए
उधर, बहुत से अभिमानी काषट्त्री युद्ध में उतर पड़े।(5)
कहीं (माथे पर रखने वाला लोहा) पड़ा है
और कहीं-कहीं टूटे हुए हेलमेट भी हैं। करोड़ों योद्धा तैयार खड़े हैं, अच्छे कपड़े पहने हुए।
कहीं-कहीं बड़े-बड़े भारी योद्धा अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित हैं।
करोड़ों हाथी जो काटे नहीं जा सकते थे, मारे गए हैं। 6.
कितने लोग (खून में) डूब गए हैं और कितने लोग पीड़ा में घूम रहे हैं।
कई लोग, जो बहुत अच्छे आकार में आये थे, खून से लथपथ हो गये थे।
कितने लोग पानी मांग रहे हैं और कितने 'मारो' 'मारो' चिल्ला रहे हैं।