दश्ला और कर्भिख (धृतराष्ट्र के पुत्र) आदि कहो और अन्त में 'अरि' शब्द का उच्चारण करो।
मुख्यतः दश्ला और करभिख (धृतराष्ट्र के पुत्र) शब्द कहकर, फिर 'अरि, अनुज, तनुज और सुतारि' कहकर बाण का नाम प्रसिद्ध हुआ।।१५८।।
सबसे पहले भीखम का नाम लें और अंत में 'अरी' शब्द लगाएं।
भीष्म का नाम पहले रखकर फिर अरि और शत्रु शब्द जोड़कर बाण नाम प्रचलित हुआ।159.
सर्वप्रथम 'तत्तत् जाह्नवी' और 'अग्रजा' (गंगा नदी) शब्दों का उच्चारण करें।
प्रथमतः जाह्नवी और अग्रजा कहकर फिर तनुज, शत्रु और सुतारि कहकर बाण के नाम पहचाने जाते हैं।160.
पहले गंगा, गिरिजा (शब्द) बोलें और फिर 'पुत्र' शब्द जोड़ें।
पहले 'गंगा और गिरिजा' कहकर फिर 'पुत्र' शब्द जोड़कर तथा बाद में 'शत्रु और सुतारि' कहकर बाण नाम प्रसिद्ध होते हैं।161.
पहले नकाले और सरितेसरी (गंगा के नाम) बोलें।
पहले ‘नाकाले और सार्तेश्वरी’ शब्दों का उच्चारण करके फिर ‘शतरि और सुतारि’ शब्दों का उच्चारण करके बाण के सभी नामों का उच्चारण किया जाता है।।१६२।।
'भीखम' और 'संतानुसुत' (शब्द) कहने के बाद 'अरी' शब्द बोलें।
'भीष्म और शान्तनु' शब्द का उच्चारण करके फिर 'अरि' शब्द जोड़कर तथा तत्पश्चात 'सुतारि' शब्द का उच्चारण करके बाण के नाम पहचाने जाते हैं।।१६३।।
गंगेय, नाडियाजा और सरिताजा (भीष्म के नाम) का उच्चारण करें और (फिर) 'शत्रु' शब्द जोड़ें।
'गंगा और नदियाज' शब्दों का उच्चारण करके, फिर 'सरितज शत्रु' कहकर, फिर 'सूत' और तदनन्तर 'अन्तरि' कहकर बाण के नाम जाने जाते हैं।।१६४।।
पहले तालकेतु और सविता (भीष्म के नाम) बोलें और अंत में 'अरि' लगाएं।
'तालकेतु और सविता' शब्दों के अंत में 'अरि' शब्द जोड़कर, 'सूत' और फिर 'रिपु' शब्द का उच्चारण करने से बाण के सभी नाम ज्ञात होते हैं।।१६५।।
पहले 'द्रोण' बोलो, फिर 'सिख्य' बोलो। इसके बाद 'सूत्री' शब्द बोलो।
पहले द्रोण कहकर, फिर शश्य कहकर और फिर सुतारि शब्द कहकर बुद्धिमान लोग बाण के सम्पूर्ण नामों को पहचान लेते हैं।।166।।
द्रोणाचार्य के पिता भारद्वाज ने पहले 'शिख्य' शब्द कहा (तत्पश्चात) 'शिख्य' शब्द कहा।
'भारद्वाज' (द्रोणाजी के पिता) शब्द का उच्चारण करने के बाद 'शिष्य और सुतारि' शब्द जोड़ने पर बाण नाम प्रसिद्ध होते हैं।167.
सोर्था
पहले 'जुधिस्तर' (शब्द) बोलें, फिर 'बंधु' (भाई) बोलें।
पहले 'युधिष्टर' और फिर 'बन्धु' शब्द कहने से बाण के सभी नाम प्रसिद्ध हो जाते हैं।।१६८।।
दोहरा
दुभया' और 'पांचाली पति' फिर 'भ्रात' (शब्द) का उच्चारण करते हैं।
'बन्धु और पांचाली-पति' शब्दों के उच्चारण के बाद 'भ्राता और सुतारि' शब्दों को जोड़ने पर बाण के सभी नाम सही-सही ज्ञात हो जाते हैं।169.
धर्मराज, धर्मजा (पहले युधिष्ठिर का नाम) का उच्चारण करके, फिर 'बंधु' शब्द जोड़ें।
धर्मज् और धर्मराज् शब्दों का उच्चारण करके फिर बन्धु शब्द जोड़कर तथा तदनन्तर सुतारि शब्द कहने से बाण नाम प्रसिद्ध होते हैं।।१७०।।
महाविद्यालय, धर्मजा, शालरिपु (युधिष्ठिर के नाम) कहकर फिर 'बन्धु' की उपाधि धारण करो।
कालज, धर्मज और शल्य रिपौ इन शब्दों का उच्चारण करके फिर बन्धु शब्द जोड़कर और तत्पश्चात सुतारि शब्द कहने से बाण के सभी नाम प्रसिद्ध हो जाते हैं।।171।।
पहले 'बैवस्त' (सूर्य) शब्द का उच्चारण करें, फिर 'सुत' शब्द का उच्चारण करें।
सर्वप्रथम ‘वैवस्वत’ शब्द का उच्चारण करने से तथा तत्पश्चात क्रमशः ‘सत्, बन्धु और सुतारि’ शब्दों का उच्चारण करने से बाण के सभी नाम ज्ञात होते हैं।।१७२।।
सबसे पहले सूर्य का नाम लें, फिर 'पुत्र' शब्द जोड़ें।
सर्वप्रथम सूर्य का नाम उच्चारण करके फिर क्रमशः पुत्र, अनुज और सुतारि शब्द उच्चारण करने से बाण के नाम प्रसिद्ध होते हैं।173.
पहले 'कालिन्द्री' (पद) कहें फिर 'अनुज' पद जोड़ें।
पहले ‘कालिंद्री’ शब्द का उच्चारण करने के बाद ‘अनुज, तनुज और अनुजाग्र’ शब्दों का उच्चारण करने से बाण के नाम पहचाने जाते हैं।174.
जमुना और कालिन्द्री (जमुना के नाम) कहते हुए फिर 'अनुज' और 'सुत' (छंद) का पाठ करें।
'सुत, अनुज और सुतारि' कहकर 'यमुना, कालिन्द्री और अनुज' कहकर बाण का नाम जाना जाता है।175.
पहले 'पाण्डु पुत्र' या 'कुर' कहें, फिर 'राज' और 'अनुज' कहें।
'पाण्डुपुत्र और कुरुराज' शब्दों का उच्चारण करके, फिर 'अनुज' शब्द जोड़कर तथा तत्पश्चात 'सुत और अरि' शब्दों का उच्चारण करके बाण के नाम बोले जाते हैं।।176।।
(पहले) 'जुडिष्टर', 'भीमग्र' और फिर 'अर्जानगर' का नाम बोलें।
'युधिष्ठर और भीमग्र' शब्दों का उच्चारण करके फिर 'अर्जुनागर' जोड़कर अंत में 'सुत और अरि' कहने से बाण का नाम जाना जाता है।।१७७।।
(पहले) 'नकुल-बन्धु' और 'सहदेव अनुज' कहें और फिर 'बन्धु' शब्द कहें।
'नकुल, सहदेव और अनुज' शब्दों का उच्चारण करने के बाद 'बन्धु और सुतरि' इन नामों का उच्चारण करने से बाण का नाम जाना जाता है।।१७८।।
पहले 'जगसेनी' (द्रौपदा की पुत्री, द्रौपदी) शब्द बोलें, फिर 'पति' शब्द जोड़ें।
पहले 'याग्यसेन' (दारौपदी) शब्द का उच्चारण करके फिर 'पति, अनुज और सुतन्तरि' शब्दों का उच्चारण करने से बाण के अनेक नाम प्रसिद्ध होते हैं।।१७९।।
पहले 'द्रौपदी' और 'द्रौपदाजा' का उच्चारण करें (फिर) 'पति' शब्द जोड़ें।
प्रारम्भ में 'द्रौपदी और द्रुपद्जा' शब्दों का उच्चारण करके तथा तत्पश्चात् 'सुपति, अनुज और सुतारि' कहकर बाण का नाम प्रसिद्ध होता है।180.