'बताओ मित्र, मुझे क्या करना चाहिए? तुम्हें छोड़कर मैं कभी किसी और के पास नहीं जाऊँगा।
मुझे घोड़े पर ले चलो
'मुझे घोड़े की पीठ पर बिठाकर ले चलो।(6)
दोहिरा
'शादी की बारात आने से पहले,
'उनके आने से पहले तुम मुझे अपने घोड़े पर सवार कर ले चलो।(7)
सवैय्या
'मैं तो तुम्हारी ही देन हूँ, मित्र, मैं दूसरा पति क्यों चाहूँ?
'मैं तुमसे शादी करने से नहीं रुकूंगी, नहीं तो मैं जहर खा लूंगी।
'तुमने अपना स्नेह बढ़ाया और मुझसे प्यार किया, अब तुम उन्हें अपनी औरत को ले जाने दोगे।
'क्या तुम भूल गए वह दिन जब तुमने मुझसे दोस्ती की थी। अब मैं शर्म से कैसे जी पाऊँगा?'(8)
जब भी कोई उससे शादी की बात करता तो उसका दिल दुखने लगता।
घबराहट में उसके हाथ मुड़ गए और उसने अपनी उंगलियां काट लीं।
वह अपनी आँखें ज़मीन पर टिकाए अपने नाखूनों से ज़मीन को खुरचती रही, प्रेमी के लिए पश्चाताप करती रही।
वह मिर्जा को चाहती थी, और कोई उसका मन नहीं चाहता था।(९)
दोहिरा
(उसकी सहेलियाँ मिर्जा से) 'वह आपके प्रेम में लीन है और कोई दूसरा उसे संतुष्ट नहीं कर सकता।
'अगर शादी के बाद दूसरे लोग उसे ले गए, तो क्या तुम खुद से विरक्त नहीं हो जाओगे?'(10)
सवैय्या
(साहिबान) 'मैं कहीं जाना नहीं चाहूंगी, एक क्षण के लिए भी नहीं।
'मेरे बारे में सोचते हुए वह सड़कों पर घूमता रहेगा।
'उसका और मेरा प्यार कैसे जीवित रहेगा?'
'मेरा क्या भला जब मेरा प्रेमी मेरे प्रेम में जलता रहेगा?(11)
चौपाई
तब (उन) मानिनी (साहबों) ने मन में सोचा
इस प्रकार बहुत सोचने के बाद उसने अपनी सहेली से पूछा,
तुम जाकर मिर्ज़ा से कहो!
'जाओ और मिर्जा से कहो कि आज अपनी साहिबान से मिलने आएं।'(12)
जब वे आएंगे और मुझसे शादी करेंगे।
जब उन्होंने मुझे ब्याह लिया था तो उसके सिर पर फूल (माला) रखने से क्या लाभ?
बताओ मेरे जाने के बाद तुम क्या करोगे?
'मेरे जाने के बाद वह क्या करेगा? क्या वह खंजर से खुद को मार लेगा?(13)
दोहिरा
(मिर्ज़ा से) अगर तुम सचमुच मुझे चाहते हो और तुम्हारा प्यार सच्चा है,
'तो रात को आओ और मुझे ले जाओ.' (14)
अरिल
जब रंगवत्ती रंगवत्ती (मित्र) ने यह सुना,
उसने पुरुष के कपड़े पहन लिये,
वह घोड़े पर सवार हुई,
और बीस अन्य मित्रों को लेकर चल पड़े।(15)
चौपाई
तब सखी वहाँ गयी
मित्रगण वहां पहुंचे और मिर्जा का कुशलक्षेम पूछा।
(सखी) अपनी सखियों के साथ गयी और (मिर्जा को) सिर झुकाया।
उन्होंने आदरपूर्वक सिर झुकाकर कहा कि साहिबान ने उन्हें तत्काल बुलाया है।(16)
मिर्जा बात सुनते रहे
यह सुनकर मिर्जा ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की और
जब सज्जनों को यह समाचार मिला