जीभ जो अनेक प्रकार के मीठे-नमकीन खाद्य-पदार्थों, पेयों का आनंद लेती है तथा सभी स्वादों का स्वाद लेती है, उसे स्वाद कहते हैं। आंखें अच्छा-बुरा, सुंदर-कुरूप सब कुछ देखती हैं, इसलिए इसे दृष्टि शक्ति कहते हैं।
कानों में सभी प्रकार की ध्वनियाँ, धुनें आदि सुनने की क्षमता होती है, इसलिए इन्हें श्रवण शक्ति कहते हैं। इन सभी शक्तियों के प्रयोग से व्यक्ति विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त करता है, अपने मन को सार्थक विचारों में लगाता है तथा सांसारिक सम्मान अर्जित करता है।
त्वचा स्पर्श के माध्यम से वस्तुओं के बारे में जागरूकता लाती है। संगीत और गीतों का आनंद, बुद्धि, बल, वाणी और विवेक पर निर्भरता भगवान का वरदान है।
परन्तु ये सभी ज्ञान इन्द्रियाँ तभी उपयोगी हैं जब कोई व्यक्ति गुरु की बुद्धि का वरदान प्राप्त कर ले, अपने मन को अमर प्रभु के नाम में लगा ले और मेरे प्रभु के नाम का मधुर गुणगान करे। उसके नाम की ऐसी धुन और राग आनंद और प्रसन्नता प्रदान करने वाला है।