कबित सव्ये भाई गुरदास जी

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ਉਤਮ ਮਧਿਮ ਅਰੁ ਅਧਮ ਤ੍ਰਿਬਿਧਿ ਜਗੁ ਆਪਨੋ ਸੁਅੰਨੁ ਕਾਹੂ ਬੁਰੋ ਤਉ ਨ ਲਾਗਿ ਹੈ ।
उतम मधिम अरु अधम त्रिबिधि जगु आपनो सुअंनु काहू बुरो तउ न लागि है ।

जिस प्रकार समाज का कोई भी वर्ग, उच्च, मध्यम या निम्न वर्ग अपने पुत्र को बुरा या दुष्ट नहीं मानता,

ਸਭ ਕੋਊ ਬਨਜੁ ਕਰਤ ਲਾਭ ਲਭਤ ਕਉ ਆਪਨੋ ਬਿਉਹਾਰੁ ਭਲੋ ਜਾਨਿ ਅਨਰਾਗਿ ਹੈ ।
सभ कोऊ बनजु करत लाभ लभत कउ आपनो बिउहारु भलो जानि अनरागि है ।

जिस प्रकार सभी लोग लाभ कमाने के लिए व्यवसाय करते हैं, किन्तु वे सभी अपने-अपने पेशे को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं और उसी से प्रेम करते हैं।

ਤੈਸੇ ਅਪਨੇ ਅਪਨੇ ਇਸਟੈ ਚਾਹਤ ਸਭੈ ਅਪਨੇ ਪਹਰੇ ਸਭ ਜਗਤੁ ਸੁਜਾਗਿ ਹੈ ।
तैसे अपने अपने इसटै चाहत सभै अपने पहरे सभ जगतु सुजागि है ।

इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने आराध्य देव का आदर व प्रेम करता है तथा अपने जीवन काल में उनकी पूजा करने के लिए सदैव तत्पर व सचेत रहता है।

ਸੁਅੰਨੁ ਸਮਰਥ ਭਏ ਬਨਜੁ ਬਿਕਾਨੇ ਜਾਨੈ ਇਸਟ ਪ੍ਰਤਾਪੁ ਅੰਤਿਕਾਲਿ ਅਗ੍ਰਭਾਗਿ ਹੈ ।੫੫੨।
सुअंनु समरथ भए बनजु बिकाने जानै इसट प्रतापु अंतिकालि अग्रभागि है ।५५२।

जिस प्रकार एक बेटा बड़ा होने पर व्यापार और व्यापार की कला को समझता है और उसमें निपुणता प्राप्त करता है, उसी प्रकार सच्चे गुरु से दीक्षा प्राप्त करने पर एक समर्पित शिष्य सीखता है कि सच्चे गुरु द्वारा आशीर्वादित ज्ञान, अमृत नाम मुक्ति में सक्षम है।