कबित सव्ये भाई गुरदास जी

पृष्ठ - 413


ਜੈਸੇ ਏਕ ਚੀਟੀ ਪਾਛੈ ਕੋਟ ਚੀਟੀ ਚਲੀ ਜਾਤਿ ਇਕ ਟਕ ਪਗ ਡਗ ਮਗਿ ਸਾਵਧਾਨ ਹੈ ।
जैसे एक चीटी पाछै कोट चीटी चली जाति इक टक पग डग मगि सावधान है ।

जिस प्रकार एक चींटी द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण लाखों चींटियाँ करती हैं, उसी प्रकार तुम भी उस पर बहुत ध्यानपूर्वक बिना एक कदम भी रुके चलो;

ਜੈਸੇ ਕੂੰਜ ਪਾਤਿ ਭਲੀ ਭਾਂਤਿ ਸਾਂਤਿ ਸਹਜ ਮੈ ਉਡਤ ਆਕਾਸਚਾਰੀ ਆਗੈ ਅਗਵਾਨ ਹੈ ।
जैसे कूंज पाति भली भांति सांति सहज मै उडत आकासचारी आगै अगवान है ।

जिस प्रकार सारस एक अनुशासित संरचना में बहुत सावधानी से शांति और धैर्य के साथ उड़ते हैं और उन सभी का नेतृत्व एक ही सारस करता है;

ਜੈਸੇ ਮ੍ਰਿਗਮਾਲ ਚਾਲ ਚਲਤ ਟਲਤ ਨਾਹਿ ਜਤ੍ਰ ਤਤ੍ਰ ਅਗ੍ਰਭਾਗੀ ਰਮਤ ਤਤ ਧਿਆਨ ਹੈ ।
जैसे म्रिगमाल चाल चलत टलत नाहि जत्र तत्र अग्रभागी रमत तत धिआन है ।

जिस प्रकार हिरणों का झुंड अपने नेता का अनुसरण करते हुए अपनी तीव्र गति से कभी नहीं डगमगाता तथा सभी बहुत सावधानी से आगे बढ़ते हैं,

ਕੀਟੀ ਖਗ ਮ੍ਰਿਗ ਸਨਮੁਖ ਪਾਛੈ ਲਾਗੇ ਜਾਹਿ ਪ੍ਰਾਨੀ ਗੁਰ ਪੰਥ ਛਾਡ ਚਲਤ ਅਗਿਆਨ ਹੈ ।੪੧੩।
कीटी खग म्रिग सनमुख पाछै लागे जाहि प्रानी गुर पंथ छाड चलत अगिआन है ।४१३।

चींटियाँ, सारस और मृग तो अपने नेता का अनुसरण करते रहते हैं, परन्तु समस्त योनियों का सर्वोच्च नेता जो सच्चे गुरु के निर्धारित मार्ग को छोड़ देता है, वह निश्चय ही मूर्ख और महाअज्ञानी होता है। (413)