जैसे पेड़ की शाखाओं से टूटे हुए पत्ते फिर से नहीं जुड़ सकते, वैसे ही पिता, माता, पुत्र, भाई ये भी पूर्वजन्मों के संयोग से बने रिश्ते हैं। पेड़ के पत्तों की तरह ये भी फिर से नहीं जुड़ सकते। इनमें से कोई भी नहीं जुड़ सकता।
जिस प्रकार पानी का बुलबुला और ओले क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार यह विश्वास और भ्रम त्याग दीजिए कि यह शरीर लंबे समय तक या हमेशा रहेगा।
घास की आग बुझने में समय नहीं लगता, और जैसे वृक्ष की छाया से लगाव बनाना व्यर्थ है, वैसे ही हमारा जीवन भी व्यर्थ है। उससे प्रेम करना व्यर्थ है।
इसलिए जीवन भर सच्चे प्रभु के नाम में लीन रहो, क्योंकि यही एकमात्र ऐसी सम्पत्ति है जो तुम्हारे साथ चलेगी और सदा तुम्हारा साथी रहेगी। तभी तुम इस संसार में अपना जन्म सफल समझो।