कबित सव्ये भाई गुरदास जी

पृष्ठ - 55


ਜੈਸੇ ਬੀਜ ਬੋਇ ਹੋਤ ਬਿਰਖ ਬਿਥਾਰ ਗੁਰ ਪੂਰਨ ਬ੍ਰਹਮ ਨਿਰੰਕਾਰ ਏਕੰਕਾਰ ਹੈ ।
जैसे बीज बोइ होत बिरख बिथार गुर पूरन ब्रहम निरंकार एकंकार है ।

जैसे बोया गया बीज वृक्ष बन जाता है और समय के साथ उसका विस्तार होता है, वैसे ही सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सर्वशक्तिमान ईश्वर के एक दिव्य रूप से एक सच्चा गुरु प्रकट होता है।

ਜੈਸੇ ਏਕ ਬਿਰਖ ਸੈ ਹੋਤ ਹੈ ਅਨੇਕ ਫਲ ਤੈਸੇ ਗੁਰ ਸਿਖ ਸਾਧ ਸੰਗਤਿ ਅਕਾਰ ਹੈ ।
जैसे एक बिरख सै होत है अनेक फल तैसे गुर सिख साध संगति अकार है ।

जिस प्रकार एक वृक्ष असंख्य फल उत्पन्न करता है, उसी प्रकार सच्चे गुरु के अनेक शिष्यों (गुरसिखों) का समूह भी असंख्य फल उत्पन्न करता है।

ਦਰਸ ਧਿਆਨ ਗੁਰ ਸਬਦ ਗਿਆਨ ਗੁਰ ਨਿਰਗੁਨ ਸਰਗੁਨ ਬ੍ਰਹਮ ਬੀਚਾਰ ਹੈ ।
दरस धिआन गुर सबद गिआन गुर निरगुन सरगुन ब्रहम बीचार है ।

सच्चे गुरु के पवित्र स्वरूप पर मन को केन्द्रित करना, जो भगवान की अन्तर्निहित अभिव्यक्ति है, शब्द के रूप में उनकी अनुभूतियाँ, उनका चिंतन और भगवान के पारलौकिक रूप को समझना ही वास्तव में अन्तर्निहित भगवान का चिंतन है।

ਗਿਆਨ ਧਿਆਨ ਬ੍ਰਹਮ ਸਥਾਨ ਸਾਵਧਾਨ ਸਾਧ ਸੰਗਤਿ ਪ੍ਰਸੰਗ ਪ੍ਰੇਮ ਭਗਤਿ ਉਧਾਰ ਹੈ ।੫੫।
गिआन धिआन ब्रहम सथान सावधान साध संगति प्रसंग प्रेम भगति उधार है ।५५।

नियत स्थान पर पवित्र मण्डली में एकत्रित होकर, पूर्ण एकाग्रता तथा प्रेमपूर्वक भगवान के नाम का ध्यान करने से मनुष्य संसार सागर से तर सकता है। (५५)