सभी इच्छाओं और इच्छाओं को पूरा करने वाले भगवान का निरंतर स्मरण मन से सभी चिंताओं को दूर करता है। जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त भगवान की पूजा करने से व्यक्ति विभिन्न योनियों में प्रवेश करने से मुक्ति प्राप्त करने में सक्षम होता है।
उस कालातीत परमेश्वर का ध्यान करने से मृत्यु का भय मिट जाता है और मनुष्य निर्भय हो जाता है। उस निर्भय परमेश्वर का गुणगान करने से मन से भय और शंका के सभी संस्कार मिट जाते हैं।
जो भगवान् का नाम बार-बार स्मरण करते हैं, उनमें द्वेष और शत्रुता की सारी भावनाएँ समाप्त हो जाती हैं। और जो लोग समर्पित मन से उनका गुणगान करते हैं, वे सभी द्वंद्वों से मुक्त हो जाते हैं।
जो मनुष्य जाति-रहित और वर्ण-रहित भगवान का झण्डा धारण करता है, उसकी जाति और वंश-परंपरा कभी नहीं देखी जाती। स्थिर और अचल भगवान की शरण में आकर मनुष्य जन्म-जन्मान्तर के चक्रों को नष्ट करने में समर्थ होता है। (४०८)