एक स्त्री अपने आप को बहुत आकर्षक श्रृंगार से सजा सकती है, लेकिन अपने पति के प्रति समर्पित हुए बिना, अपने बेटे के साथ खेलने का सुख नहीं ले सकती।
यदि किसी पेड़ को दिन-रात पानी दिया जाए तो वह वसंत के अलावा किसी अन्य मौसम में फूल नहीं खिला सकता।
यदि कोई किसान सावन के महीने में भी अपने खेत को जोतकर उसमें बीज बो दे तो बिना वर्षा के बीज अंकुरित नहीं हो सकते।
इसी प्रकार मनुष्य चाहे कितने ही वेश धारण कर ले, संसार भर में भ्रमण कर ले, फिर भी वह गुरु की दीक्षा और उपदेश के बिना ज्ञान की चमक प्राप्त नहीं कर सकता। (635)