वह अपने मन में एक ही प्रभु, हर, हर का स्मरण करता है।
घोर अंधकार में, एक दीपक चमकता है।
हे नानक, संदेह, भावनात्मक लगाव और दर्द मिट जाते हैं। ||६||
तपती गर्मी में, सुखदायक शीतलता व्याप्त है।
हे भाग्य के भाई-बहनों, खुशियाँ आती हैं और दुख दूर हो जाता है।
जन्म-मृत्यु का भय दूर हो जाता है,
पवित्र संत की उत्तम शिक्षाओं द्वारा।
भय दूर हो जाता है और व्यक्ति निर्भयता में रहता है।
मन से सारी बुराइयां दूर हो जाती हैं।
वह हमें अपना मानकर अपने अनुग्रह में ले लेता है।
पवित्र लोगों की संगति में भगवान का नाम जपें।
स्थिरता प्राप्त होती है; संशय और भटकाव समाप्त हो जाता है,
हे नानक! अपने कानों से प्रभु का गुणगान सुनो, हर, हर। ||७||
वह स्वयं भी पूर्ण और असंबद्ध है; वह स्वयं भी सम्मिलित और संबंधित है।
अपनी शक्ति प्रकट करते हुए वे सम्पूर्ण जगत को मोहित कर लेते हैं।
परमेश्वर स्वयं ही अपनी लीला प्रारम्भ करता है।
केवल वही स्वयं अपने मूल्य का अनुमान लगा सकता है।
प्रभु के अलावा कोई नहीं है।
वह सबमें व्याप्त है, वह एक ही है।
वह हर जगह, हर रूप और रंग में व्याप्त है।