संत कबीर अपने संतत्व को नहीं त्यागते, भले ही उन्हें लाखों दुष्टों का साथ मिले।
जब चन्दन को सर्प भी घेर लेते हैं, तब भी वह अपनी शीतल सुगंध नहीं छोड़ता। ||१७४||
भगत कबीर जी की बानी